नमस्कार दोस्तों। हमारे वेब पोर्टल पर आपका फिर से हार्दिक स्वागत है। दोस्तों आज हम बहुत ही इंटरस्टिंग टाॅपिक आपके लिए लेकर आए हैं। स्पेस में जाने की इच्छा तो बचपन में हम सबकी होती होगी। बचपन ही क्या, बड़े होकर भी ये इच्छा हमारी खत्म नहीं होती है। क्या करें, ये अंतरिक्ष की दुनिया है ही इतनी रहस्यमई और रोमांच भरी। यही कारण है कि एस्ट्रोनाॅट्स इन रहस्यों का पता लगाने के लिए अंतरिक्ष में मिशन पर अकसर जाते रहते हैं।

अब तो तकनीक इतनी विकसित हो गई है कि कई बार इंसानों को न भेजकर रोबोट को अंतरिक्ष के राज़ से पर्दा उठाने के लिए भेजा जाता है। जो अंतरिक्ष यात्री स्पेस में जाते हैं वो वहां की तसवीरें विज्ञान की मदद से हमारे वैज्ञानिकों तक पहुंचाते हैं। फिर ये वैज्ञानिक इन तसवीरों के आधार पर रिसर्च करके वहां की भौगोलिक स्थित को भांपते हैं और किसी नतीजे पर पहुंचते हैं। ऐसे बहुत से लोग हैं जो ‘काश’ में ही रह जाते हैं। काश मैं अंतरिक्ष की सैर कर पाता।

लेकिन उस ‘काश’ के हौसले को ‘आकाश’ की उड़ान देना इतना भी आसान नहीं है। जिसने इस चुनौती को पार कर लिया वही कहलाता है असली सिकंदर। एक सदी के महान ने कहा था कि जब तक लोग धरती से ऊपर उठकर आसमान की ओर नहीं बढ़ेगा, तब तक यह संभव ही नहीं है कि वह अपनी दुनिया को बेहतर तरीके से समझ पाए। उन्होंने ये बात तब कही थी जब इंसान आकाश में दिखने वाले तारों और सूरज को घूरता रहता था।

चलिए, अब आपको बताते हैं कि आखिर अंतरिक्ष में पहुंचने के बाद ये अंतरिक्ष यात्री आखिर रहते कहां हैं? दरअसल, इसका जवाब है स्पेस स्टेशन। आइए आपको विस्तार से समझाते हैं कि यह क्या होता है और कैसे काम करता है। इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन को अंतरिक्ष में इंसानों के रहने के लिए ही स्थापित किया गया है। जैसे धरती पर लोगों को रहने के लिए घरों की आवश्यकता पड़ती है। ठीक उसी तरह अंतरिक्ष यात्रियों के लिए इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन घर है। इसे इंसानों की सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए ही बनाया गया है।

क्या है अंतरिक्ष स्टेशन ?

दोस्तों, अंतरिक्ष स्टेशन को हम सब एक अन्य नाम से भी जानते हैं। वो नाम है ऑर्बिटल स्टेशन। जो भी एस्ट्रोनाॅट यहां रुकता है उसे हर वो सुविधा प्रदान की जाती है जो एक इंसान को जीवन जीने के लिए जरूरी है। दूसरे शब्दों में कहें तो यह हम इंसानों द्वारा बनाया गया एक ऐसा स्टेशन है जिससे कोई अंतरिक्ष यान जाकर पृथ्वी से मिल सकता है। इसी स्पेस स्टेशन से वायु मंडल में गोल घूमती हमारी पृथ्वी का सर्वेक्षण किया जा सकता है।

इसके अतिरिक्त इसमें इतनी क्षमता होती है कि आसानी से इस पर एक अंतरिक्ष यान उतारा जा सके। आपको जानकर हैरानी होगी दोस्तों, कि वर्ष 2018 तक पूरी दुनिया में केवल दो ही स्पेस स्टेशन वायुमंडल में स्थापित किए गए हैं। इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन और चीन का पेयंगांग 2 स्पेस स्टेशन। इन्हें इसी लिए बनाया गया है ताकि एस्ट्रोनाॅट्स यहां आसानी से लंबे समय तक रह कर रिसर्च कर सकें।

अंतरराष्ट्रीय स्पेस स्टेशन वैज्ञानिकों द्वारा तैयार किया गया ऐसा स्टेशन है जहां से अंतरिक्ष के बारे में बहुत ही गहराई से रिसर्च की जा सकती है। इस स्टेशन को छोट-छोटे टुकड़ों में ले जाकर ऑर्बिट यानी कक्ष में एसेम्बल किया गया है। अंतरिक्ष यात्री 2 नवम्बर 2000 से लगातार यहां पर काम कर हरे हैं। इस स्पेस स्टेशन में कई सारे सोलर पैनल लगे हुए हैं। इसका वजन है करीब 3 लाख 91 हजार किलो है। इस स्पेस स्टेशन में अंतरिक्ष यात्री करीब 6 महीने तक रह सकते हैं। यह पृथ्वी से करीब 248 मील यानी एप्राॅक्स 400 किलोमीटर की ऊंचाई पर उड़ता है। केवल 90 मिनट में ही यह करीब 17500 मील प्रति घंटे की रफ्तार से हमारी पृथ्वी का चक्कर लगा सकता है।

यह एक दिन में लगभग 3 लाख 84 हजार 400 किलोमीटर की दूरी तय कर लेता है। जो कि पृथ्वी से चांद पर जाकर वापस लौटने की दूरी के बराबर है। 18 देशों के करीब 230 लोगों ने इस स्पेस स्टेशन का दौरा किया है। भारतीयों का गौरव कल्पना चावला और सुनीता विलियम्स भी इस पर खोज कर चुकी हैं। शायद आप में से बहुत कम लोग ये जानते होंगे कि स्पेस में सबसे ज़्यादा समय तक रहने का रिकाॅर्ड किसके नाम है। वर्ष 2017 की 2 सितम्बर को पेगी विट्सन ने लगभग 665 दिनों तक यानी सबसे लंबे समय तक स्पेस में रहने का रिकाॅर्ड अपने नाम कर लिया था। इसमें केवल दो ही बाथरूम हैं।

अंतरिक्ष यात्रियों तथा प्रयोगशाला के जानवरों का यूरीन फिल्टर होकर पुनः स्टेशन के ड्रिंकिंग वाॅटर सप्लाई में चला जाता है। जिससे अंतरिक्ष में रहने वाले यात्रियों को कभी भी पानी की कमी झेलनी न पड़े। इस स्टेशन में ऑक्सीजन इलेक्ट्रोलिसिल प्रक्रिया के जरिए आती है। रात के समय यह स्पेस स्टेशन आकाश में चंद्रमा और सूर्य के बाद तीसरा सबसे चमकदार स्टेशन है। स्पेस स्टेशन 357 फीट में बना हुआ है। इतनी लंबाई एक फुटबाॅल के मैदान से भी बड़ी है। इसका वजन 320 कारों के बराबर है।

कैसे बना यह स्पेस सेंटर

दोस्तों, आइये अब जान लेते हैं कि इस स्पेस स्टेशन को बनाया कैसे गया। 1998 में इसकी शुरूआत की गई थी। जाहिर सी बात है इतने बड़े मिशन को पूरा करना किसी एक देश के बस में नहीं था। इसके लिए कई देशों ने हाथ मिलाया था। हालांकि पहले इसे केवल 15 वर्षों के लिए ही अंतरिक्ष में रखने का विचार था। लेकिन एक करार के मुताबिक 2020 तक इसे स्पेस में रखा गया था। शटल यान कोलंबिया वर्ष 2003 में हादसे का शिकार हो गया। इसके बाद ही नासा ने इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन को खाली छोड़ने की सोची। परंतु बाद में यहां हर समय अंतरिक्ष यात्री रखने का निर्णय सर्वसम्मति से लिया गया। अब जानते हैं इसके बारे में कुछ रोचक तथ्य।

1. जिन 16 देशों ने इस स्पेस स्टेशन को बनाने में मदद की उनमें शामिल हैं इटली, नीदरलैंड, स्पेन, ब्राजील, डेनमार्क, रूस, कनाडा, बेल्जियम, अमेरिका, फ्रांस, जापान, जर्मनी, नार्वे, स्वीडन, स्विजरलैंड और यूके। 2. आई एस एस के इलेक्ट्रिक सिस्टम में 8 मील का तार है। यह न्यूयॉर्क के सेंट्रल पार्क की परिधि से भी बड़ा है।
3. धरती पर हाईवे पर 65 मील प्रति घंटा भले ही स्टैंडर्ड स्पीड क्यों न हो लेकिन ऑर्बिट पर यह पांच मील प्रति सेकेंड की रफ्तार से दौड़ता है। यह केवल 90 मिनट में ग्रह का चक्कर लगा सकता है।
4. अंतरिक्ष के रहस्यों का पता लगाने के लिए बने इस स्टेशन को बनाने में लगभग 120 बिलियन डॉलर लगे हैं।
5. अंतरिक्ष में किसी भी समय जब कोई अंतरिक्षयात्री यान से निकलकर अंतरिक्ष में कदम रखता है, तो उसे स्पेस वॉक कहते हैं। 18 मार्चए 1965 को रूसी अंतरिक्षयात्री एल्केसी लियोनोव ने पहली बार स्पेस वॉक की थी।
6. आप यह जानकर दांतों तले उंगली दबा लेंगे कि स्टेशन के 52 कंप्यूटरों में भी बहुत बार वायरस ने अटैक किया है।
7. यहां रहने वाले अंतरिक्ष यात्री पूरे दिन में केवल तीन बार खाना खाते हैं। लेकिन वो बैठ कर खाना नहीं खा सकते। वो हवा में बस खुद को स्थिर रखकर तैरते हुए खाना खाते हैं।