लहरों से डरकर नौका पार नहीं होती, कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।

दोस्तों, हरिवंश राय बच्चन ने जब यह कविता लिखी थी तो कभी सोचा नहीं था कि ये पंक्तियां युगों-युगों तक ऐसे लोगों के लिए प्रेरणा का स्त्रोत बन जाएंगी जो अपनी चुनौतियों के आगे घुटने टेक देते हैं। जिंदगी में जब तक सब कुछ ठीक चल रहा है तो कभी ईश्वर का शुक्रिया अदा नहीं करते लेकिन जैसे ही कोई मुसीबतों का पहाड़ जीवन में टूट पड़ता है तो तुरंत ईश्वर से कहने लग जाते हैं कि ऐसा मेरे साथ ही क्यों? उस खुदा को जो त्रिकाल दर्शी है अंतरयामी है, उसे अपनी अच्छाइयों की दुहाई देने लगते हैं।

कहते हैं कि जो अपनी मदद नहीं करता, भगवान भी उसकी मदद नहीं करते। अपनी नाकामी को किस्मत की चादर ओढ़ाकर, हिम्मत हार कर बैठ जाना कहां का न्याय है? हरिवंश राय बच्चन की इन पंक्तियों को जिसने भी अपने जीवन में उतारा है वो दुखों के बोझ से दूर, सुख के समंदर में गोते लगा रहा है। इस दुनिया में ऐसे ऐसे हीरे पैदा हुए हैं जिन्होंने समाज के द्वारा दिए जा रहे तानों को हंस कर सहा, अपनी कमजोरी को अपनी ताकत बनाया। आज वो उस मुकाम पर हैं जहां उनकी सफलता के आगे उन्हें भला बुरा कहने वाले लोगों के मुंह पर अपने आप ताला लग गया है।

आज हम आपको बताने जा रहे हैं एक ऐसे शख्स की कहानी, जिसे सुनकर आपको भी बहुत बड़ी सीख मिलेगी। लगन, मेहनत और खुद पर विश्वास ये सफलता के ताले की चाबियां हैं। दोस्तों आज पूरी दुनिया में जिस एप्प का डंका बजता है वो है युवा दिलों पर राज करने वाला ‘व्हाट्सएप’ एप्प। नेटवर्किंग की दुनिया में ये नाम अनजान नहीं है। आज बच्चे से लेकर बड़ों तक यहां तक कि बुजुर्ग भी इसके बिना एक पल भी नहीं रह सकते। ऐसा होना लाज़्मी भी है। आज दुनिया भर में व्हाट्सएप के करोड़ों यूजर्स हैं। इसके जरिए वो अपने उन दोस्तों से भी ऑडियो वीडियो काॅल पर बात कर सकते हैं, चैटिंग कर सकते हैं जो इनसे मीलों दूर रहते हैं।

अच्छा, अगर अब हम आपसे पूछें कि 10 सेकेंड में जवाब दीजिए, व्हाट्सएप को किसने बनाया है? इसके सह-संस्थापक का नाम क्या है? आप में से शायद कुछ लोग बता देंगे। परंतु बहुत से लोग इस बात से अनजान होंगे। जो बता देंगे वो कृपया खुद को शाबाशी दे लें, जो न बता पाएं वो अपडेट हो जाएं। उस व्यक्ति का नाम है नेटवर्किंग इंडस्ट्री के बादशाह ‘जेन कूम’। व्हट्एप की जब शुरूआत हुई तो उसके पांच वर्ष के भीतर ही 45 करोड़ यूजर्स इस एप्प के हो गए थे। दोस्तों, किसी भी काम को करने के लिए पैसा चाहिए होता है। वो पैसा विज्ञापनों से ही आता है। परंतु व्हाट्सएप की खासियत यह है कि इसमें विज्ञापनों के लिए कोई जगह है ही नहीं। जेम ने ब्रेन एक्टन के साथ मिलकर इस एप्प को बनाया था।

आपको यह जानकर हैरानी होगी कि जिस फेसबुक ने आज इस एप्प को अरबों डाॅलर में खरीदा है। एक समय वो भी था जब इसी फेसबुक ने इन दोनों को अपनी कंपनी में नौकरी देने से मना कर दिया था। जेन कूम का जन्म हुआ था 24 फरवरी, 1976 को यूक्रेन के कीव शहर में। इन्होंने सोशल नेटवर्किंग की दुनिया में जबरदस्त क्रांति ला दी है। इनके संघर्ष की कहानी जानकर किसी को भी यकीन नहीं होगा कि जो व्यक्ति आज अरबपतियों में शामिल है कभी ऐसा भी दौर था जब इन्हें घंटों फ्री के लंगर की लाइन में लग कर एक वक्त की रोटी खाने को मिली थी। जेन 16 वर्ष की आयु में ही वो अमरीका में अपनी मां और दादी के साथ रहने लगे और पिता को छोड़ दिया। सोवियत संघ में इन्हें एक नोटबुक मिली। इसके इस्तेमाल से इन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा प्राप्त की थी। जब पेट की आग सता रही हो और कंधों पर जिम्मेदारियों का बोझ हो तो कोई भी काम मिल जाए तो वो ईश्वर का वरदान माना जाता है। ऐसा ही इनके साथ भी हुआ।

आर्थिक स्थिति अच्छी न होने के कारण इन्होंने एक किराने की दुकान में झाड़ू लगाने का काम शुरू कर दिया। कहते हैं, जब मुसीबत आती है तो चारों तरफ से आती है। इनकी मां कैंसर से पीड़ित हो गईं। सरकार की ओर से इनकी मां के इलाज के लिए कुछ पैसे मिले। इन्हीं पैसों से जेन काॅम ने अपनी कुछ किताबें खरीदीं और कम्प्यूटर नेटवर्किंग का ज्ञान भी हासिल किया। बाद में इन्हीं किताबों को पुरानी किताबें खरीदने वाली दुकान पर बेच भी दिया। फिर कूम ने सिलिकाॅन वैली के एक गवर्नमेंट यूनिवर्सिटी में एडमीशन लिया। इसके साथ ही वो आजीविका कमाने के लिए एक कम्पनी में सिक्योरिटी टेस्टर का काम भी करने लगे।

इसी बीच याहू कम्पनी में 1997 में उन्हें काम करने का मौका मिल गया। यहां पर उनकी मुलाकात हुई बैन एक्टन नामक एक शख्स से। यही आगे चलकर जेन काॅम के बिजनेस पार्टनर भी बने। इन्होंने करीब 9 वर्षों तक याहू कम्पनी में काम किया। यहां से 25 लाख रुपए जुटाकर याहू को अलविदा कर दिया यानी जाॅब छोड़ दी। इन्होंने इसके बाद कुछ नया करने की सोची। जनवरी 2009 जेन नेे नया एप्पल का आईफोन खरीदा। अपनी जिम की पाॅलिसी के मुताबिक वो इस फोन को जिम में इस्तेमाल नहीं कर पाते थे।

इन्होंने फिर स्काइप का इस्तेमाल करना शुरू कर दिया। गलती से एक दिन ये अपने स्काइप अकाउंट का पासवर्ड भूल गए। वो अपने जीवन की परेशानियों से तग आ गए थे। अब जेन ने अलग हट कर करने की सोची। उन्होंने सोचा कि क्यों न एक ऐसा एप्प बनाया जाए तो केवल एक फोन न. की मदद से दो लोगों को आपस में जोड़ सके। उन्होंने ये बात अपने दोस्त एक्टन को बताई। फिर दोनों ने इस आइडिया पर वर्क करना शुरू कर दिया। जब ये दूसरी कम्पनियों में जाॅब की ट्राई कर रहे थे जैसे ट्विटर, फेसबुक आदि तो सभी ने इन दोनों को लाल झंडी दिखा दी। इनकी सक्सेस स्टोरी पर रिजेक्शन का ठप्पा लगा दिया। इन्होंने हिम्मत नहीं हारी। साथ ही यह भी ठान लिया था कि वे लोगों को अपने काम के बल पर जवाब देंगे।

बाद में इनके आइडिया व्हाट्सएप का पता लगते ही याहू के कुछ पूर्व अधिकारियों ने इन्हें प्रोजेक्ट में फंडिंग करने का मन बनाया। सभी के सहयोग से आखिरकार वर्ष 2010 में इस एप्प को लाॅंच किया गया। शुरूआत में ही इस कंपनी ने 5000 डाॅलर प्रति महीना कमाने लगी। इतना ही नहीं, वर्ष 2011 में इस एप्प ने एसी उड़ान भरी कि फेसबुक के मालिक जिन्होंने इन्हें अपनी कम्पनी में लेने से मना कर दिया था वो भी सदमे में आ गए।

वर्ष 2014 में फेसबुक के मालिक मार्क जकरबर्ग ने कूम को फ्रेंड रिक्वेस्ट भेजी। उन्होंने शोहरत की बुलंदियों को छूने के बाद भी कभी घमंड नहीं किया। फेसबुक से साथ व्हाट्सएप की डील उन्होंने वहीं पर साइन की जहां पर वो संघर्ष के दिनों में लंबी लाइन लगाकर खाना मिलने का इंतजार किया करते थे। जेन का कहना है कि हमें हमेशा अपने अतीत को याद रखना चाहिए। यह संघर्ष करने की प्रेरणा देता है।

तो दोस्तों ऐसी ही अमेजि़्ाग स्टोरीज जानने के लिए बने रहिए हमारे साथ।