हैल्लो दोस्तों, कैसे हैं आप सब। हसना हमारी जिंदगी का एक अहम हिस्सा है। जब हम हसंते हैं तो हमारे शरीर का खून 10 गुना बढ़ जाता है। कई जगहों पर बुजुर्गों के लिए लाफ्टर क्लब भी खोले जाते हैं। या फिर पार्क में एक टाइम फिक्स करके जोर-जोर से हसने की एक्सरसाइज़् उन्हं उन्हें करवाई जाती है। हमारे हंसने और खुश रहने से दिल भी मजबूत और स्वस्थ रहता है।

आज हम आपसे बात करेंगे टीवी की दुनिया पर करीब 11 वर्षों से अपना दबदबा कायम करने वाले शो श्तारक मेहता का उल्टा चशमा शो के बारे में। इसी फाॅर्मुले से लोगों के दिलों पर इस शो ने लंबे समय तक राज किया है।
इसने टीआरपी के सारे रिकाॅर्ड ही तोड़ दिए। जो भी यह शो देखता है वो इसका दीवाना हो जाता है। इस शो में हमें जिंदगी के अलग अलग रंग देखने को मिलते हैं। लेकिन काॅमेडी की कोटिंग के साथ। न शुरूआत में इसकी पाॅपुलैरिटी कम हुई थी और न आज हुई है।

जैसे ही यह सीरियल सोनी सब पर आने का समय होता है तो क्या बच्चे और क्या बुजुर्ग, हर कोई सारा काम धाम छोड़कर एक बड़े से ईडियट बाॅक्स के आगे बैठ जाते हैं और टकटकी बांध कर ‘‘तारक मेहता का उलटा चशमा’’ देखने लगते हैं। यह सोनी सब पर रात 8.30 बजे आता है।

इस सीरियल की एक खास बात यह है कि लोगों ने इस शो को ही नहीं, बल्कि इस सीरियल के मुख्य किरदार जेठालाल और दया बेन की जोड़ी को भी अपने दिलों में जगह दी है। अब तो मानो ये दोनों उनके घर से सदस्य बन गए हैं।
अगर दया बेन की आंख से एक भी आंसु गिरता है तो फैंस के घर आंसुओं की बाढ़ आ जाती है।

जेठालाल जरा भी दुःखी होते हैं तो लोगों को गहरा सदमा सा लगता है। लोगों को इस शो के हर एक किरदार से लगाव सा हो गया है। आज हम आपको तारक मेहता सीरियल की स्टारकास्ट जेठालाल की रीयल लाइफ के बारे में बताने वाले हैं। आपको उनकी रियल लाइफ की पत्नी के बारे में भी बताएंगे।

जेठालाल ;दिलीप जोशी

शायद आप में से बहुत कम लोग ये जानते होंगे कि जो जेठालाल टीवी पर अपने चुटकुले अंदाज़् से दर्शकों को हंसा-हंसा कर लोटपोट कर देता है उसका असली नाम क्या है। जेठालाल का रियल नेम है दिलीप जोशी। जेठालाल का हंसमुख स्वभाव किसी के भी मन को भा जाएगा। हां ये बात और है कि उनका मन तो अपने सामने वाली खिड़की में रहने वाली खिड़की में रहने वाली बबीता जी के पीछे बांवरा हुआ पड़ा है। वो हर बार सोचते हैं कि बबीता जी को अपने दिल की बात कह दें लेकिन डायरेक्टर साहब हैं कि मानते ही नहीं।

अरे भई जब तक डायरेक्टर साहम हरि झंडी नहीं देंगे तब तक इनके प्यार की नईया पार कैसे लगेगी। यहां पर तो यही गाना फिट बैठता है ‘‘प्रेम की नईया तो राम के भरोसे हैं, अपनी भी नईया को पार तू लगाई दे।’’ अईयर साहब जो बबीता जी के पति का किरदार निभा रहे हैं उनका और जेठालाल का तो 36 का आंकड़ा है। हा हा हा। तारक मेहता का उल्टा चश्माश् में जेठालाल की पत्नी का किरदार दया बेन निभा रही हैं लेकिन असल में दिलीप जोशी की पत्नी जयमाला है। उनकी एक बेटा और बेटी भी है। बता दें कि दिलीप जोशी यानी जेठालाल का जन्म 1968 में पोरबंदर के गोसा गांव के एक ब्राह्मण परिवार में हुआ था।

स्कूल के दिनों में दिलीप को एक बार प्ले करने का मौका मिला। तब उनकी उम्र थी महज़् 12 वर्ष। बस फिर क्या था। उन्हें एक्टिंग का चस्का लग गया। जहां एक ओर दिलीप का एक्टिंग को लेकर रुझान बढ़ता जा रहा था। तो वहीं दूसरी ओर घरवालों का दबाव भी था कि स्कूलिंग तो उन्हें पूरी करनी ही पड़ेगी। अब मरता क्या न करता जनाब। उन्होंने कुछ समय के लिए अपने एक्टिंग के भूत को मजबूरी की बोतल में बंद कर दिया। इसके बाद उन्होंने मुंबई के एन एम काॅलेज में काॅमर्स और इकनाॅमिक्स की स्ट्रीम के साथ ग्रेजुएशन के लिए दाखिला लिया। काॅलेज के दिनों में ही दिलीप जोशी काॅलेज के साथ-साथ एक्टिंग भी करने लगे थे।

उनकी बाॅंडिंग बहुत सारे थिएटर ग्रुप के साथ थी। विभिन्न प्रकार की प्रतियोगिताओं में दिलीप जोशी अपने काॅलेज को रिप्रेजेंट किया करते थे। होता वही है जो किस्मत में लिखा होता है। उनकी बिजी शिड्यूल के चलते वो पढ़ाई पर ध्यान नहीं दे पाए और जब रिज़्ल्ट की बारी आई तो वो फेल हो गए। जब उन्होेंने अपने पिता को यह बात बताई कि वो फेल हो गए हैं तो उन्होंने कुछ भी नहीं कहा।

इस बात से जेठालाल काफी शॅक्ड हुए। फिर उन्हें इस बात की समझ आई कि हो न हो, उनके पिता भी अब इस बात को स्वीकार करने लगे हैं कि उनके बेटे यानी दिलीप का इंटरेस्ट एक्टिंग में ही है और उनका सपना आगे चलकर एक्टर बनने का ही हैै। उनके पिता ने उन्हें सपोर्ट किया।

उन्होंने दिलीप को पढ़ाई के लिए प्रेशराइज़् करना बंद कर दिया। न ही इस बात पर जोर डाला कि दिलीप को ग्रेजुएशन कम्प्लीट करनी ही पड़ेगी। एक्टिंग के भूत को अब उन्होंने बोतल से निकाला और खुद में समा लिया। इसके बाद दिलीप बाॅलीवुड में अपने पैर जमाने का सपना लिए मुम्बई आ गए। उन्होंने अपने स्ट्रगल की शुरूआत वहीं से की जहां से अधिकतर एक्टर्स करते हैं। यानी मुंबई स्थित पृथ्वी थिएटर पर। वहीं से वो रंग भूमी में पार्टिसिपेट करने लगे। धीरे-धीरे करके विभिन्न शो में उन्हें एंट्री मिलती चली गई। अब फिल्म इंडस्ट्री में भी इनका ग्रुप बन चुका था।

उन्होंने बहुत सारे गुजराती प्ले में काम भी किया। इसके अलावा गुजराती फिल्मों में भी जेठालाल ने कई सारे रोल अदा किए। बाॅलीवुड में उनके पंखों को एक नई उड़ान मिली फिल्म ‘मैंने प्यार किया’ से। माना कि ये फिल्म सुपर हिट हुई। लेकिन इसका सारा स्टारडम अपने सल्लू मियां ने खींच लिया। लोगों का ध्यान उनकी ओर आकर्षित हो गया और दिलीप जोशी पर किसी ने ध्यान भी नहीं दिया। इस फिल्म में उनकी भूमिका एक सर्वेंट की थी। इनका रोल बहुत छोटा होने के कारण भी किसी का ध्यान उनपर नहीं गया।

फिर बारी आई फिल्म ‘‘हम हैं बेमिसाल’’ की। इसमें भी उन्हें छोटा सा ही रोल मिला जिसे किसी ने नोटिस नहीं किया। फिल्म इंडस्ट्री में उन्हें करीब तीन साल हो चुके थे जिनमें दिलीप ने कई सारी फिल्मों में छोटे-छोटे रोल निभाए। लेकिन इनकी होप उससे कहीं आगे की थी। वो सोचते थे कि कभी न कभी किसी न किसी मोड़ पर उन्हें अपनी किस्मत का ताला खोलने वाली चाभी मिलेगी ही।

इस बार उन्हें काम करने का मौका मिला सूरज बड़जातिया की फिल्म ‘‘हम आपके हैं कौन’’ में। डायरेक्टर ने इस फिल्म में दिलीप जोशी को भोला प्रसाद का किरदार निभाने को कहा। वही भोला प्रसाद जो फिल्म में अपनी शकुंतला को ढूंढने लगता है। रोल भले ही छोटा हो पर ये फिल्म बहुत ही बड़ी थी। जब यह फिल्म रिजीज़ हुई तो इसने बाॅक्स ऑफिस के पिछले सारे रिकाॅर्ड तोड़ दिए।

परंतु यहां भी सलमान खान की पाॅपुलैरिटी ने दिलीप को जनता का कोई अटेंशन गेन करने नहीं दिया। उन्हें कोई फायदा नहीं मिल पाया। अब भी वो काम की तलाश में इधर उधर भटक रहे थे। वो जगह जगह आडीशन्स देने जाने लगे। बीच बीच में वो एक या दो दिन के शूटिंग असाइनमेंट भी लगे। लेकिन जब परमानेंट काम देने की बारी आती तो सभी अपने हाथ पीछे खींच लेते थे। पर इस व्यक्ति ने बिलकुल हिम्मत नहीं हारी और मेहनत करता गया। पर पिक्चर अभी बाकी है मेरे दोस्त। जेठालाल ने अब टीवी की दुनिया में कदम रखने की सोची। उनहोंने छोटे पर्दे का रुख करके टीवी सीरियल में आने के लिए हाथ पैर मारे।

यह एक नया प्लैटफाॅम था दिलीप के लिए। इसलिए उनका स्ट्रगल भी नया था। टीवी में आने के लिए भी उन्होंने कई सारे आडीशन्स दिए और टीवी के लोगों से काॅन्टैक्ट बनाना शुरू किया। दीलीप जोशी हार मानने वालों में से नहीं थे। उन्हें 1995 में एक सीरियल मिला उस सीरियल का नाम था ‘‘कभी ये कभी वो’’। फिर उन्हें रंगास्वामी का रोल मिला सीरियल क्या बात है में। इस किरदार को लोगों ने काफी पसंद किया। फिर 1999 में उन्हें एक और शो में काम मिला जिसका नाम था ‘‘ये दुनिया है रंगीन’’।

इसके बाद इनका एक और शो था जो काफी पाॅपुलर हो गया था। उस शो का नाम था ‘‘शुभ मंगल सावधान’’। जहां उन्हें टीवी की दुनिया में पहचान मिल रही थी तो वहीं उन्होंने फिल्मी दुनिया में काम करना भी चालू रखा। उन्होंने ‘‘खिलाड़ी 420’’, ‘‘फिर भी दिल है हिन्दुस्तानी’’ और ‘‘हमराज़ जैसी फिल्मों में भी काम किया।’’ फिल्मी दुनिया और टी वी सीरियल दोनों में ही इन्हे खूब काम मिल रहा था। कसर रह गई थी तो बस नेम और फेम की। वो एक्टिंग की दुनिया में 1989 से काम कर रहे थे।

इधर उम्र बढ़ती जा रही थी और उधर कुछ ही सेकेंड्स के रोल इनके साथ जैसे फैवीकोल की तरह चिपक गए थे। वो बड़ा रोल करने और इस लाइन में अपना नाम कमाने की बहुत कोशिश कर रहे थे लेकिन उन्हें हर सीरियल या फिल्म में छोटे मोटे रोल ही मिलते रहे। उन्होंने एफआईआर नामक सीरियल में भी कैरेक्टर रोल प्ले किए। इसका मतलब होता है कि जब आपकी जरूरत होगी आपको बुला लिया जाएगा और आपको बड़ा या इंपाॅर्टेन्ट रोल नहीं दिया जाएगा। ये दौर था साल 2006 का जब वो इस तरह के रोल निभाते थे।

एक समय ऐसा भी आया जब दिलीप जोशी को डेढ़ साल तक घर पर ही बैठना पड़ा। उन्हें कोई काम नहीं मिला किसी भी फील्ड में। फिर साल 2008 में एक शो सब टीवी पर आया जिसमें डायरेक्टर थे असित कुमार मोदी। इस शो का नाम था ‘‘तारक मेहता का उल्टा चश्मा।’’ चैंकाने वाली बात यह है दोस्तों, कि असित कुमार ने 1999 में ‘‘ये दुनिया है रंगीन नामक एक शो किया था’’।

असित कुमार ने अपने दोस्त को फिर से इस शो के लिए याद किया। दिलीप जोशी को असित कुमार ने इस शो में एक रोल ऑफर किया था। वो रोल जेठालाल का नहीं था। पहले उन्हें चम्पक चाचा का रोल ऑफर किया गया था। असित कुमार और दिलीप जोशी की काफी गहरी दोस्ती थी। लिहाजा उन्होंने असित को कहा कि बाप के रोल में वो फिट नहीं हो सकते। दिलीप ने जेठालाल वोले कैरेक्टर निभाने की रिक्वेस्ट की। इसके बाद जब उनका आडीशन लिया गया और उन्होंने जेठालाल की वीडियो देखी तो वो इस रोल के लिए परफेक्ट दिखे। बस फिर क्या था, उन्हें जेठालाल के रोल के लिए साइन कर लिया गया।

जब साल 2008 में ये शो रिलीज़ हुआ तो लोगों को यह शो हद से ज़्यादा पसंद आया था। देखते ही देखते कुछ ही दिनों में ये शो बहुत ज्यादा पाॅपुलर हो गया। उन दिनों या तो टीवी पर सास बहु के सीरियल चल रहे थे। या फिर अगर कोई काॅमेडी शो था तो वो बहुत ही लो क्लास का था। यानी कि उसमें डबल मीनिंग बातें और फूहड़पन भरा हुआ था। औरतों का सीरियल घर की महिलाएं ही देखती थीं और नाॅनवेज काॅमेडी शो को देखना कोई पसंद नहीं करता था। बच्चे तो ऐसे शो को बिलकुल नहीं देख सकते थे।

तब असित कुमार मोदी का जादू चल गया। उन्होंने उस समय का पहला ऐसा सीरियल बना दिया था जिसे हर वर्ग के लोग यानी पूरी फैमिली एक साथ बैठ कर देख सकती थी। साल 2010 में यानी कि दो साल बाद ही इस शो ने कलर्स टीवी पर आने वाले शो बालिका वधु को भी पीछे छोड़ दिया जो कि काफी ज़्यादा पाॅपुलर था। फिर ये बन गया मोस्ट वाॅचेबल शो आन टीवी।

इस शो की बुलंदियों को छूने के पीछे जेठालाल यानी दिलीप जोशी का बहुत बड़ा हाथ था। टीवी की दुनिया का ये सबसे लाॅंगेस्ट रनिंग शो है। केवल जेठालाल ही नहीं, इस शो का हर एक कैरेक्टर आज किसी सिलेब्रिटी से कम नहीं है। इसकी पाॅपुलैरिटी का अंदाजा इसी बात से लगाईए कि बड़े-बड़े फिल्म स्टार्स इस शो में अपनी आने वाली फिल्म को प्रोमोट करने के लिए आते हैं।

तो दोस्तों, हमें उम्मीद है आपको जेठालाल सक्सेस स्टोरी पसंद आई होगी। आप भी इनसे प्रेरणा लेकर अपनी लाइफ को कामयाबी की हाइट्स पर पंहुचा सकते हैं।