हैल्लो, नमस्ते, आदाब, सत्श्रीअकाल। कैसे हैं आप सब। दोस्तों, पहले के मुकाबले हमारा भारतीय सिनेमा आज काफी विस्तृत हो गया है। आज इसमें एक्शन भी है, ड्रामा भी है और साथ ही साथ काॅमेडी भी है।

हांलाकी काॅमेडी पहले भी थी लेकिन आज के दौर में इस विधा में काफी बदलाव आए हैं। भारतीय सिनेमा ने हमें कई ऐसे कलाकार दिए जिन्हें हम अपनी सर आंखों पर बिठाकर रखते हैं।

बाॅलीवुड के काॅमेडी किंग तो जाॅनी लीवर को कहा जाता है। एक सच्चा कलाकार वहीं है जो अपने अभिनय से किसी किरदार में जान फूंक दे। दोस्तों काॅमेडी एक ऐसी विधा है जो आज बाॅलीवुड की मुख्य विधा बन गई है।

इसे बड़े पर्दे पर निभा पाना कोई बच्चों का खेल नहीं है जनाब। बहुत से ऐसे कलाकार हैं जिन्होंने एक्टिंग को घोल कर पी लिया है। यानी वो अपनी इस कला में माहिर हो गए हैं। अगर हम उन्हें भी किसी फिल्म में काॅमेडी करने को कह दें तो उनके भी पसीने छूठ जाएंगे।

चलिए आपको कुछ काॅमेडी एक्टर्स के नाम बताते हैं जिन्होंने काॅमेडी के क्षेत्र में अपनी एक अमिट छाप छोड़ी है। जैसे राज पाल यादव, जाॅनी लीवर, संजय मिश्रा, कादर खान। अज हम जिस शख्सियत के बारे में आप से बात करने जा रहे हैं वो ऐसे कलाकार हैं जिन्हें ईश्वर ने काॅमेडी की कला तोहफे में दी है। ऐसे हम उनका नाम नहीं बताने वाले। आप खुद गेस कीजिए इस डायलाॅग से।

‘‘दरअसल हम जब भी हिचकी ले रहे हैं, कौए का आवाज आ रहा है।’’

जी हां। सही पकड़े हैं। हम बात कर रहे हैं बेहतरीन काॅमेडी एक्टर ‘‘विजय राज़’’ की। दोस्तों, ये एक सफल एक्टर, डायरेक्टर, काॅमेडियन और वाॅयस डबिंग आर्टिस्ट हैं।

ये एक ऐसे एक्टर हैं जिन्होंने अपने फिल्मी करियर के शुरूआती दौर में बहुत ही छोटे-छोटे रोल प्ले किये। इतने छोटे रोल कि इन्हें क्रेडिट तक नहीं दिया जाता था। आप अपने टैलेंट के दम पर विजय राज़ ने लोगों के दिल में अपनी एक खास जगह बना ली है।

इनका ऑरा भी कुछ ऐसा है। लंबा-पतला सा शरीर, चेहरे पर शिकन लिए रहते हैं। बात करने का अंदाज़ ऐसा कि लोग पेट पकड़-पकड़ कर हसें। इनकी इसी संजीदगी भरे अंदाज़ के लोग कायल हैं।

असल ज़िंदगी और सोशल मीडिया पर इनके चाहने वाले लोगों की फेहरिस्त काफी लंबी होती जा रही है। चाहे वो मानसून वेडिंग के पी के दुबे हों, रन फिल्म के गणेश हों, धमाल फिल्म के डी के मलिक हों, ढिशुम मूवी के खबरी चाचा हों या फिर लूट केस फिल्म के बाला राठौर।

इनकी शख्सियत ऐसी है कि लोग इनको बार बार फिल्म में देखना चाहते हैं। इनके किरदार ऐसे हैं कि सोचने भर से ही हंसी छूट जाए। इस दमदार अभिनय से लोगों के दिलों को हिप्नोटाइज़ करने वाले एक्टर विजय राज़ का जन्म 5 जून साल 1963 को दिल्ली में हुआ।

हालांकि इनके माता पिता कौन हैं इसकी जानकारी अभी नहीं मिल पाई। इनकी स्कूलिंग दिल्ली के गवर्मेंट स्कूल से पूरी हुई। विजय राज़ ने दिल्ली के किरोड़ीमल काॅलेज से अपनी बी.काॅम डिग्री कम्पलीट की।

विजय को बचपन से ही फिल्मों में रूचि थी। कहते हैं अपने काॅलेज के दिनों में भी ये काॅलेज की ड्रामा मंडली ‘‘द प्लेयर्स’’ का हिस्सा हुआ करते थे। एक बार खाली समय में उन्होंने अपने थिएटर ग्रुप के दोस्तों से कहा कि उन्हें भी कोई छोटा सा रोल दे दें प्ले में।

तब उन्होंने धीरे-धीरे थिएटर ग्रुप का हिस्सा बनना शुरू किया और अलग-अलग प्ले में हिस्सा लेना शुरू किया। जब भी विजय राज़ थिएटर करते तो अपनी एक्टिंग से लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचा करते थे।

बाद में वो इस ग्रुप के परमानेंट हिस्सा बन गए। तभी विजय राज़ को ये समझ में आ गया था कि अगर उन्हें किसी लाइन में अपना कैरियर बनाना है तो वो है थिएटर। हालांकि अभी तक उन्होंने फिल्मी दुनिया का रुख करने की नहीं सोची थी।

इसके बाद एक्टिंग में करियर बनाने के लिए उन्होंने दिल्ली में ही एक थिएटर ग्रुप ज्वाइन किया। इस थिएटर ग्रुप का नाम था ‘‘साक्षी कला मंच।’’ इस थिएटर के अंतर्गत उनका पहला प्ले था ‘‘पागल घर।’’

इस दौरान उनके को एक्टर्स में शामिल थे नवाजुद्दिन सिद्धिकी । उनके सीनियर थे ‘‘मनोज बाजपेयी’’ इस दौरान उन्होंने करीब 10 वर्षों तक सिर्फ और सिर्फ थिएटर ही किया। जब वो थिएटर में माहिर हो गए, उसी समय वो दिल्ली के एनएसडी यानी नैशनल स्कूल ऑफ़ ड्रामा से भी जुड़ गए।

एनएसडी की एक स्पेशल विंग है जिसमें थिएटर के आर्टिस्टों को चुना जाता है और उन्हें एनएसडी के कलाकारों के साथ काम करने का मौका दिया जाता है। इसी बीच एक प्ले ‘‘अग्नि और वर्षा’’ प्ले में जब विजय राज़ परफाॅर्म कर रहे थे तो नसिरुद्दीन शाह की नजर विजय राज़ पर पड़ी।

उन्होंने विजय को बड़ी ही बारीकी से देखा। जब नसीर ने उनके फेशियल एक्सप्रेशन देखे तो पहले उन्हें यही लगा कि ये फोटोग्राफी का ही कमाल होगा। जब उन्होंने विजय से मुलाकात की तो उन्हें एक खास बात विजय के बारे में पता चली।

उन्हें यह पता चला कि इसमें ऐसा बाॅडी कंट्रोल है कि ये बड़ी ही आसानी से अपने हर फेशियल एक्सप्रेशन को कंट्रोल कर सकता है। वहीं से उनका इंपैक्ट नसीरुद्दीन शाह पर पड़ा। इन्होंने ही विजय को मुम्बई आने का न्यौता दिया था।

फिर यहां पर दो-तीन डायरेक्टर्स को विजयराज़ के लिए नसीरुद्दीन शाह ने रेकमेंड किया। इस तरह विजय को अपनी सबसे पहली फिल्म मिली जिसका नाम था ‘‘मौनसून वेडिंग’’ इसमें उन्होंने पी के दुबे का रोल बखूबी निभाया था।

इस फिल्म में नसीर भी मौजूद थे। परंतु विजय राज़ की जो पहली फिल्म रिलीज़ हुई थी वो थी भोपाल एक्सप्रेस। इस फिल्म में भी नसीरुद्दीन शाह उनके साथ थे।

मुम्बई आने के बाद विजय की मुलाकात मनोज वाजपेयी से भी हुई जो कि उस वक्त राम गोपाल वर्मा के बेहद करीबी माने जाते थे। इसीलिए विजय राज़ को काम मिला राम गोपाल वर्मा की फिल्म ‘‘जंगल’’ में।

‘‘मौनसून वेडिंग’’ में विजय राज़ के रोल को दर्शकों ने काफी ज़्यादा पसंद किया। इसीलिए उनके लिए अलग-अलग फिल्मों में रोल आने लगे। इसी बीच उन्हें मिली ‘‘अक्स’’, ‘‘कम्पनी’’ और ‘‘शक्ति’’ जैसी फिल्में।

इसके बाद 2004 में एक फिल्म आई जिसका नाम था ‘‘रन।’’ इस फिल्म में लीड हीरो थे अभिषेक बच्चन। लीड एक्ट्रेस थी भूमिका चावला। लेकिन इस फिल्म का पूरा क्रेडिट विजय राज़ को ही मिला। आज भी इस फिल्म को अगर लोग पसंद करते हैं तो वो है विजय राज़ का कौआ बिरयानी वाला सीन।

अगर लोगो से पूछा जाए कि रन फिल्म की स्टोरी क्या है? लीड रोल किसने किया? एक्ट्रेस कौन थी? कब रिलीज़ हुई ये फिल्म। तो आप में से बहुत से लोग शायद न बता पाएं। क्योंकि बाकी कुछ भी इस फिल्म के बारे में लोगों को याद ही नहीं है।

याद है तो बस ‘‘कौवा बिरयानी’’ खाने वाले काॅमेडियन का सीन। इस सीन के कारण ही रन फिल्म को दर्शकों का खूब प्यार मिला। विजय राज़ का ये केरेक्टर ऐपिक बन गया। इसके बाद ‘‘युवा’’ और ‘‘आन’’ जैसी फिल्मों में भी विजय राज़ दिखाई दिए।

फिर वो पहली बार लीड रोल में दिखे फिल्म ‘‘रघु रोमियो’’ में। इस फिल्म को बेस्ट फिल्म ऑफ़ द ईयर का नेशनल अवाॅर्ड भी मिला। तब से विजय राज़ ने बाॅलीवुड पर अपनी अमिट छाप छोड़ दी।

फिल्मों में भले ही इनका रोल छोटा होता था। लेकिन लोग इनकी अदाकारी के दीवाने होते थे। ये जो भी करते थे उसमें अपना 100 परसेंट देते थे। वर्ष 2014 में विजय राज़ ने एक्टिंग से हटकर कुछ किया।

उन्होंने पहली बार डायरेक्शन में अपना हाथ आज़्माया। डायरेक्टर के तौर पर उनकी पहली फिल्म थी ‘‘क्या दिल्ली क्या लाहोर।’’ वो और बात है कि इस फिल्म को बाॅक्स ऑफिस में ज़्यादा कामयाबी नहीं मिली मगर क्रिटिक्स ने इस फिल्म की जमकर तारीफ की थी।

विजय राज़ ने ही लोगो को ये सिखाया कि रियल और नेचुरल एक्टिंग किसे कहते हैं। इन्होंने ‘‘स्त्री’’, ‘‘ड्रीम गर्ल’’ और ‘‘गली बाॅय’’ जैसी फिल्मों में भी काम किया है। इसके अलावा वेब सीरीज़ ‘‘चैपस्टिक’’ में भी विजय राज़ ने अपने अभिनय से दर्शकों का दिल जीत लिया।

इसके परिवार की बात करें तो विजय की शादी हुई ‘‘अन्स अपाॅन ए टाइम इन मुंबई’’ और ‘‘गब्बर इज़ बैक’’ जैसी फिल्मों में काम कर चुकीं अभिनेत्री कृष्णा राज़ से। ये वही विजय राज़ हैं जिन्होंने नाना पाटेकर का फिल्मों में ‘‘वेल्कम’’ किया।

क्योंकि इनका मानना था कि ‘‘ये आंखें नहीं कैमरा हैं और इस कैमरे ने नाना के अंदर के कलाकार को पहचान लिया था।’’ विजय राज़ ने नाना पाटेकर को घोड़े पर बिठाकर उनके छक्के छुड़ा दिए थे।

साथ ही लोगों को पेट पकड़ कर हसने पर मजबूर कर दिया था। आपको बता दें कि एक बार जब ये किसी फिल्म की शूटिंग के लिए दुबई गए। तो वहां से वापस आते समय इन्हें एयरपोर्ट पर ही गिरफ्तार कर लिया गया।

इनपर आरोप था कि इन्होंने अपने बैग में ड्रग्स छुपाए थे। हालांकि उनपर लगा आरोप गलत साबित होने पर उन्हें छोड़ दिया गया। इनपर एक और आरोप लगा वो था फिल्म रन की शूटिंग के दौरान उनपर एक महिला एक्ट्रेस से छेड़छाड़ का।

विजय राज़ को एक बार फिर से गिरफ्तार कर लिया गया। हालांकि गिरफ्तारी के कुछ समय बाद ही उन्हें अदालत से जमानत मिल गई थी। विजय राज़  ने अब तक 100 से भी ज़्यादा फिल्मों में काम किया है।

तो फ्रेंड्स। आशा है आपको हमारा ये आर्टिकल पसंद आया होगा। फिर मिलेंगे एक नई जानकारी के साथ। नमस्कार।