नमस्कार दोस्तों। एक बार फिर से आपका हम स्वागत करते हैं अपनी वेबसाइट पर। आज हम आपको करवाने वाले हैं एक बेहद खूबसूरत राज्य की सैर। तो बोलिए मेरे साथ, खुल जा सिम सिम, आइए करें सैर सिक्किम की। सिक्किम की सैर पर चलने से पहले आपको कुछ बातों की जानकारी होनी जरूरी है। सिक्किम की राजधानी का नाम है गंगटोक।

इसकी समुद्र तल से ऊंचाई करीब 1750 मीटर है। यह स्थान अपने अद्भुत प्राकृतिक सौंदर्य के लिए पूरे विश्व में जाना जाता है। यहां पर करीब 140 से भी अधिक गुफाएं हैं। यही कारण है कि इसे गुफाओं का शहर भी कहते हैं। क्षेत्रफल की बात करें तो यह करीब 7096 वर्ग किलोमीटर है। यहां की जनसंख्या है 540493 के करीब। यहां की साक्षरता दर है 82.2 प्रतिशत।

यहां पर 4 जिले हैं। पहला जिला है उत्तर सिक्किम जिला यानी मंगन। दूसरा जिला दक्षिण सिक्किम जिला जिसे नाम्ची भी कहा जाता है। तीसरा जिला पूर्व सिक्किम में गन्तोक के नाम से जाना जाता है। अंतिम जिला है पश्चिम का गेजिंग जिला। दोस्तों, जैसा कि आप सब जानते हैं हर राज्य की कुछ विशेषताएं होती हैं। अपना राज्य पशु, राज्य फल आदि होता है। इसी प्रकार सिक्किम का राज्य पशु है लाल पांडा। राज्य पक्षी है रक्त महूका। राज्य वृक्ष की बात की जाए तो वो है रीडोडेंडरोन। यहां का राज्य फूल है आर्किड डेंडरोबियम नोबाइल

यहां की मुख्य भाषाओं में हिन्दी, भूटिया, लेपचा और नेपाली। दोस्तों ये तो हुई इस राज्य की भौगोलिक स्थिति की बात। अब एक नजर इसके इतिहास पर भी डाल लेते हैं। सिक्किम का इतिहास करीब 350 वर्ष पुराना है। जिसने यहां पर सबसे पहले शासन किया उस शासक का नाम था फुंसौंग नामग्याल। तिब्बती बौध लामाओं ने इसे राजा घोषित किया था। कहते हैं जब 1970 के दौरान यहां पर गृह युद्ध छिड़ा, उसी के बाद 1975 में सिक्किम, भारत का 22वां राज्य बना।

अब हम अपनी सिक्किम की यात्रा शुरू करते हैं। इस दुनिया में ऐसा विरला ही कोई होगा जिसे पहाड़ों और उसके आस पास की खूबसूरत वादियों से प्यारा न हो। पहाड़ों के सौंदर्य को अपने कैमरे में कैद करने के लिए लालाइत लोगों के लिए तो यह शहर जन्नत यानी स्वर्ग से कम नहीं है। सिक्किम का इलाका चारों ओर से पहाड़ियों से घिरा हुआ है। वैसे तो यहां पर कई सारी घूमने लायक स्थान हैं। इतने, कि आप कन्फूजिया जाएंगे कि कहां जाएं और कहां न जाएं। तो हम किस मर्ज की दवा हैं जनाब। हम आपको बताते हैं 14 ऐसे बेहतरीन जगहों के बारे में जिन्हें अगर सिक्किम आकर आपने मिस कर दिया तो पछतावे के सिवा कुछ हाथ नहीं आएगा।

मंगन


दोस्तों जैसा कि हमने आपको पहले भी बताया। मंगन सिक्किम का एक जिला है जो पूर्वी हिमालय की गोद में बासा है। यह देश के सबसे उच्च पर्यटन स्थलों में से एक है। यह जगह ऐसे लोगों के लिए बनी है जिन्हें हर छुट्टियों में किसी दिल्चस्प, शांत, प्राकृतिक स्थान और आकर्षक स्थान पर जाना पसंद होता है। ऐसे ही लोगों के लिए प्रकृति ने मंगन नामक तोहफा दिया है। यहां पर बहुत से घूमने लायक जगहें हैं जिनमें से एक है शिंगबा रोडोडेंड्रोन सैंचुरी। शिंगबा रोडोडेंड्रोन यहां का राजकीय पौधा भी है।

करीब 40 प्रकार के रोडोडेंड्रोन पौधे इस सेंचुरी में लगे हुए हैं। यही नहीं, यहां पर आपको विभिन्न प्रकार के पहाड़ी जानवर भी देखने को मिल जाएंगे। अगर आप कंचनजंगा की पहाड़ियों के नजारे का लुत्फ उठाना चाहते हैं तो आप भी मंगन से करीब 12 किलोमीटर की दूरी पर स्थित सिंघिक गांव जा सकते हैं।

गुरू डोंगमर झील

साथियों, आप अगर सिक्किम में घूमने आए हैं या घूमने का मन बना रहे हैं तो इस स्थान पर घूमना बिलकुल भी न भूलें। यह झील सिक्किम की बहुत ही लोकप्रीय, पवित्र और सुंदर झीलों में से एक है। लाचेंग से यह झील करीब 60 किलोमीटर दूर है। गंगटोक से इस झील की दूरी है 190 किलोमीटर। ये झील समुद्र तल से 17800 फीट ऊंची है। यह बेहतरीन झील देखने में बहुत ही सुंदर और साफ सुथरी है। पर्यटन विभाग ने इसके रख-रखाव की जिम्मेदारी ली है। यह झील कंजनजंगा पर्वतमाला के उत्तर पूर्व में बनी एक अनोखी झील है।

हैरानी की बात यह है कि चीन की सीमा से यह झील केवल मात्र 5 किलोमीटर दूर है। इसी झील से तीस्ता नदी का उद्गम भी होता है। यह झील सिक्ख और बौद्ध दोनों धर्मों के लिए पवित्र मानी जाती है। कहते हैं कि जब गुरू नानक देव जी तिब्बत जा रहे थे तो उन्होंने ने यहां के पानी से अपनी प्यास बुझाई थी। यह झील सिक्किम की जान है। यह दुनिया की सबसे ऊंची झीलों में से एक है। इस झील के नाम के पीछे एक और कहानी है। कहते हैं गुरू पद्मसंभवा ने अपनी तिब्बत यात्रा के दौरान यहीं पर उपासना की थी। यहां इतनी ज्यादा ठंड पड़ती है कि पूरी झील बर्फ में बदल जाती है।

इससे तंग आकर एक बार लोगों ने गुरू पद्मसंभवा से प्रार्थना की कि इसका कोई उपाय करिए नहीं तो पीने के पानी की दिक्कत हो जाएगी। तब गुरू ने इस झील में अपना हाथ डाल दिया। जिस जगह गुरू ने हाथ डाला, कहते हैं उस जगह झील का पानी कभी नहीं जमता बेशक कड़ाके की ठंड क्यों न हो। इसीलिए इस झील का नाम गुरूडोंगमार पड़ा।

लाचुंग गांव

इस शहर की खूबसूरती का एहसास आपको एक अलग ही दुनिया में ले जाएगा। आपको बता दें, लाचुंग की समुद्र तल से ऊंचाई 9600 फिट है। यह शहर लाचेन और लाचुंग नामक दो नदियों के संगम पर स्थित है। यही आगे जाकर तीस्ता नदी में भी मिलती हैं।

दरअसल, लाचुंग का शाब्दिक अर्थ है ‘‘छोटी सी घाटी’’। यह शहर अपनी प्राकृतिक सुंदरता और मठों के लिए फेमस है। इन्हीें में से एक है लाचुंग मठ जिसे देखने के लिए दुनिया भर से लाखों पर्यटक हर साल आते हैं। वैसे तो यह जगह अपने आप में अद्भुत नजारों से भरी पड़ी है। लेकिन जब यहां पर बर्फ पड़ती है तो यहां के दृश्य को शब्दों में बयां कर पाना मुश्किल है। इस शहर की सुंदरता का जिक्र विख्यात ब्रिटिशर जोसेफ डोल्टन हुकर ने अपने एक लेख ‘‘द हिमाल्यन जर्नल’’ में भी किया है।

उन्होंने इसे सिक्किम के सबसे सुंदर गांव कहकर संबोधित किया है। यह गांव अपने सुंदर झरनों, प्राचीन नदियों और सेबों के विशाल बागीचों के लिए पूरी दुनिया में मशहूर है। यहां पर आने वाले पर्यटक लाचुंग के मीठे सेब, खुमानी और आड़ु का स्वाद कभी नहीं भूलते। अगर आपको हाथ से बनी हुई चीज़े जैसे शोपीस, अच्छे लगते हैं तो आपको यहां स्थापित हथकरघा केंद्र जरूर घूमने आना चाहिए। यहां स्थानीय हस्तशिल्प का बेशकीमती नमूना भी देखने को मिलेगा। यहां पर कई सारे एड्वेंचर स्पोर्ट्स खेले जाते हैं। जिन लोगों को स्कींग स्पोट्र्स का शौक है वे लोग यहां से कुछ दूर पर स्थित पुन्नी स्थान पर आ सकते हैं।

युमथांग घाटी

दोस्तों, यह स्थान सिक्किम की सबसे खूबसूरत स्थानों में से एक है। इसे फूलों की घाटी के नाम से भी जाना जाता है। खासकर वसंत ऋतु में तो यहां का सौंदर्य देखते ही बनता है। इस दौरान यहां पर गुलाब और बरुंश जैसे जंगली फूल पूरी तरह खिल जाते हैं और यहां आने वाले लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र बन जाते हैं। यहां के आस पास भी बहुत सारे देखने लायक स्थान मौजूद हैं।

सिक्किम की राजधानी से यह स्थान 148 किलोमीटर दूर है। समुद्र तल से इसकी ऊंचाई है 3575 मीटर। युमथांग घाटी के दाहिनी ओर गर्म पानी का झरना भी लोगों को अपनी ओर आकर्षित करता है। यहां पर एक स्थान है जो काफी फेमस है। उसका नाम है सात बहनें झरना। एक खास बात, यहां पर भारी बर्फबारी होती है। इसलिए दिसम्बर से मार्च तक यह स्थान पर्यटकों के लिए बंद रखा जाता है।

लाचेन गांव

दोस्तों, सिक्किम की यह जगह काफी ज्यादा फेमस है। चलिए सबसे पहले इसके नाम का मतलब बताते हैं। दरअसल, लाचेन नाम का मतलब होता है ‘‘बड़ा दर्रा’’। यह एक छोटा सा गांव है जो कि सिक्किम के उत्तर में स्थापित है। गंगटोक से इसकी दूरी करीब 129 किमी दूर है। इसकी ऊंचाई है लगभग 2750 मीटर।